नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर जारी प्रदर्शन के दौरान 15 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने कार्रवाई की। प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। अंकिता के माता-पिता को भी पुलिस अपने साथ ले गई, लेकिन करीब दो घंटे बाद सुबह 6 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। परिवार ने साफ कर दिया है कि कथित वीआईपी कनेक्शन की निष्पक्ष जांच और दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
तड़के 3:45 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
15 अक्टूबर की सुबह करीब 3:45 बजे दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान भी शामिल थे। हिरासत में लिए गए लोगों को तिलक मार्ग थाने ले जाया गया। अंकिता के माता-पिता को भी हिरासत में लिया गया था, जिन्हें सुबह करीब 6 बजे छोड़ दिया गया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा समेत कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि परिवार शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग कर रहा था, लेकिन कथित वीआईपी पहलू की जांच की मांग पर ध्यान देने के बजाय प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया।
माता-पिता की दो टूक, नियुक्ति रद्द होने तक जारी रहेगा आंदोलन
अंकिता की मां ने स्पष्ट किया कि जब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, तब तक परिवार अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली में धरना देने की अनुमति नहीं मिलती है, तो परिवार अपने घर पर भूख हड़ताल करेगा।
वहीं, अंकिता के पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। परिवार का कहना है कि कथित वीआईपी संलिप्तता से जुड़े पहलुओं की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए और मामले की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने परिवार से की मुलाकात
14 अक्टूबर की शाम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इंडिया गेट पहुंचे थे। दोनों नेताओं ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया।
राहुल गांधी ने सामाजिक माध्यम पर इस मामले में न्याय मिलने में हुई देरी और कथित वीआईपी पहलू की जांच को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने भी परिवार की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना के छह दिन बाद, 24 सितंबर को उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों दोषियों को हत्या, सबूत मिटाने और अन्य आरोपों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इसके बावजूद अंकिता का परिवार मामले में कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि जब तक इस पहलू की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उसकी लड़ाई जारी रहेगी।
